अपना सबकुछ
दांव पर लगा
जीत और हार के बीच
झूलते हुए व्यक्ति से पूछो
कितने युग होते हैं
एक क्षण में
पूछो
किसी डरे हुए व्यक्ति से
कितनी लम्बी होती है
डर की उम्र
पूछो किसी स्वजन के
खो जाने का दुख
कितना लम्बा होता है
उम्र की ये डोर कभी कभी
सदियों से भी लम्बी लगती है
जीवन के दिन
बस कहने को चार हैं
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