ये ट्विटर की गलियाँ बड़ी रूमानी हैं !! फेसबुक वाले इश्क करना नहीं जानते ऐसा नहीं है लेकिन ट्विटर का संसार इश्क में सम्भावनाओं को अनंत विस्तार दे देता है।आप कब एक गली से गुजरते हुए किसी दूसरे की प्रेम कथा में किरदार बन जाते हो पता ही नहीं चलता....... सामने वाला कब आपसे मोहब्बत करने लगे ये भी नही पता चलता और ये भी कि कब वो रूठ के दूसरी गली में पहुंच गया या अपना खाता ही बंद करके दूसरे खाते से आपका हिसाब लेने लगा है...... !!
सब कुछ बड़ी तेजी से और बड़े ही दिलचस्प अंदाज़ में घटता है। नायिका के नखरे और नायक का टशन...... थोड़ी स्लाई,थोड़ी मलाई , जरा सा जैम ,जरा सा रायता !! कहानी आगे बढती है तो टीएल पर दिल तैरने लगता है !! आँखों से उतरते हुए गालों पर चिपका दिल और बिना टैग किये चल रही गुफ्तुगू रेडियो FM की फील देने लगती है। इधर एक प्रेम कथा अवतरित होने लगती है ,उधर मोहल्ले के सारे भूतपूर्व या भावी दावेदारों के DM खनखनाने लगते हैं ! कुछ चचा -बाबा ,मौसियाँ और आंटियां भी चौराहे पर कनफुसियाने लगती हैं।
जिनसे दूसरों का सुख देखा नहीं जाता वे उनकी उम्र , शादी शुदा होने के लक्षण टटोलने लगती हैं !! लड़के या लड़की के उसकी पुराने प्रेम से हुए प्रेमालाप को सीसी करते हुए ,RT और फेवरेट एजेंसियों के माध्यम से नव अंकुरित प्रेमांगन में बो दिया जाता है।
ज्ञान बंटने लगता है , नैतिक शिक्षा और संस्कारों की क्लास शुरू हो जाती है। परिवार के बड़े बूढ़े जम जाते हैं ,ये समझाने के लिए कि तुम जो कर रहे हो उससे भारतीय संस्कृति नष्ट हो जायेगी, तो करना है तो ऐसे करो कि संस्कृति की चिड़िया भी दाना खाती रहे और कोई बालक -बालिका निराश भी ना रहे।
लोगों की हाय लग जाती है !! धीरे धीरे TL पर तलाक की नौबत आ जाती है , ब्रेकअप के सीन का क्लाईमेक्स तब होता है जब बता कर दो खाते एक दूसरे को या तो बाय बाय कहते हैं या ब्लाक कर देते हैं। ये प्रक्रिया भी इतनी आसान नहीं होती ! दर्द में सरोबार TL देख कर तमाम follower गेट वेल सून का संदेश भेजने लगते हैं , दर्द फिर भी कम नहीं होता तो गीत -गज़ल -शेर शायरियां.......तमाम दवाइयां काम में ली जाती हैं। हालत ऐसे हो जाते हैं कि मरीज बस मरता नहीं है लेकिन लगता ऐसा है कि अभी मर ही जाएगा !!
फिर एक लम्बा सन्नाटा छा जाता है !! सीन से कोई एक गायब होता है और दूसरा मोदी -राहुल -केजरीवाल , बिग बॉस या क्रिकेट पर लिखने लगता है या किसी और के जीवन दर्शन से अपनी TL को गुलाबी कर रहा होता है। कुछ दिन ऐसे ही बीतते हैं , वक्त मरहम लगा देता है तो खोया हुआ खाता भी लौट आता है..... अपनी वापसी की घोषणा ऐसे करता है मानो स्वर्ग जीत के आया है या फिर से जिन्दा हुआ है !!
और फिर वही ज्ञान , अज्ञान , जीवन ,प्रेम..... विरक्ति की बातें करते करते फिर किसी रोज किसी रूमानियत का शिकार हो जाता है।
अद्दभुत माटी सा संसार है ये !! जीवन का असली दर्शन यहीं है...... सच यही है कि सच कुछ भी नहीं और झूठ मान कर भी क्या साबित कर सकते हो ? भीड़ है पर सब अकेले हैं ! चीखना चाहते हैं पर शब्द नहीं हैं ,आवाज़ है पर वक्त किसी के पास नहीं है !!
सब तरफ शोर है लेकिन यहाँ पार्क का वो एक कोना भी है जहाँ से चाँद , परिंदे , ख्वाहिशें और सरसराहट सब हासिल है.......टहलने के पगडन्डी है ! झील और समन्दर में उतरे चाँद तारे हैं , कंधों पर बोसा देता किसी का अहसास भी है ...... किसी का वजूद ही इश्क है तो कोई बांसुरी लिए राधा को खोज रहा है ! कोई बूँद से तृप्त है, कोई इश्क में सूफीयत के कलाम पढ़ रहा है !!
जो भी है , लज्जत है यहाँ ! चच्चा के चाय के अड्डे जैसी रौनक है... कुछ पल आईये ,बैठिये और निकल लीजिये ! इस रूमानियत को पारले जी मान चाय के साथ सुड़क लें और मुस्कुराते हुए निकल लें ....... असल जिन्दगी से दो चार होने के लिए जहाँ कंक्रीट है ,पैसे की लपकझपक है और आपके अपने हैं जो आपके हाथ से फोन छूटने का इंतज़ार कर रहे होते हैं..............!!
5 comments:
sir you must write or join Nilesh Misra. I am a fan Sudhir Sir
बहुत सुंदर, वाह
😊👌
😊👌
Hahaha
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