Thursday, 4 October 2018

ट्विटर से गिरे , खजूर पे अटके

अपने ब्लॉग में आयी आपकी प्रतिक्रियाओं ने मुझे विश्वास दिलाया है कि मैं ट्विटर को वही समझा हूँ जो आप भी समझ रहे हैं लेकिन कह नहीं रहे हैं ! जो कह रहे हैं , सोच के कह रहे हैं कि ये ना लगे कि मैं सही समझ गया और आप समझते हुए पकड़े गए।

ट्विटरिया इश्क़ के इस जंगल राज में कई किले हैं ,भूलभुलैयां हैं , गाँव ऐसे भी है जो बसे नहीं , मल्टीस्टोरी भी हैं और कहीं एक स्टोरी भी नहीं !! चाँद की तस्वीरें और उसके शुक्रिया के इंतज़ार में कुछ की स्टोरी फुटपाथ पर ही बीती जा रही है |

यही खेल चलता है यहाँ !! वो किस को कह रही है या उसने वैसा किस के लिए कहा ,इसको डीकोड करने में पूरा पूरा दिन लग जाता है और कई बार यहां के अड्डेबाज़ पूरी पूरी रात भी इस रहस्य पर से पर्दा उठाने में नाकाम हो जाते हैं  !! कयास लगाए जाते हैं ,संभावनाएं व्यक्त की जाती हैं और संकेतों ही संकेतों में पुराने नज़दीकी खातेदारों के इर्दगिर्द शक की सुइयां घूमने लगती हैं। भीतर का करमचंद जासूस ये जानने के लिए मचल जाता है आखिर प्रेम में पगे ये आखर किस जोगी को अपने दरवाजे खींच लाने के लिए लिखे गए हैं !!

वो कहता है तुम्हारा आँचल आसमान है,तो वो परिंदे की तरह टूट के उसके इश्क़ में समा जाना चाहती है ! वो तो बस नहीं चलता वरना दोनों के खाते भी एक ही छत के नीचे बन जाये और छत पर चढ़कर दोनों कॉफी के प्यालों को टकराते हुए अपने इश्क का ऐलान कर दें ........ कुछ कर भी देते हैं ! उनके ऐलान ए इश्क के साथ TL उनके दिल ,फूल और #तुम #हाँ_तुम #इश्क़ जैसे हैश हैंगरों पर टंग जाती है |

जो बेचारे कुछ कर नहीं सकते,इस सबको देख के खून का RT और फेवरेट करते हैं ! बोलते वाह्ह हैं पर असल में दिल से निकलती आह्ह  है !! अरमान हैं , सबके मचलते हैं | किसी का झुमका ,किसी की बिंदी ,किसी की लल्लनटाप आँखे और किसी की दिल्ली की सड़कों जैसी जुल्फें ..........

रहम किसी गली में नहीं और चैन किसी जगह नहीं !!! नहीं देखा जाता ,नहीं संभाला जाता किसी का किसी से इस कदर इश्क़ तो उसे म्यूट कर दिया जाता है। कुछ दिन चैन रहता है लेकिन DM फिर भी पूछ लेता है ,ब्रेकअप हुआ कि नहीं !! मतलब पूछता ऐसे है कि जैसे वही वेटिंग में अगला नंबर उसी का ही है।

जानकारी मिली कि मामला ठंडा चल रहा है ,आजकल उसके ट्वीट RT नहीं करता और वो उसके कॉन्वो में भी नहीं आती ! व्हाट्सप्प टनटना जाता है या DM मचलता है " तुम ठीक हो ना " ....... दो ऑप्शन है ,या तो इग्नोर या तो फिर हवा दे दो !! अब कितना झूठ बोलने सुनने के बाद भगवान उठाएगा इनको, इसका हिसाब तो चित्रगुप्त जी को उनका डेटा दे ही देगा।

अजीब दुनिया है !! दाल कुकर में फुफकारें मारती पूरा चौका भर देती है लेकिन मन में इश्क और उसका स्टेटस हिलोरें मार रहा होता है और एक रोज जब सारी दुनिया सो रही होती है ,दोनों ढूंढ ढूंढ के अपने प्रेमालाप ऐसे डिलीट कर रहे होते हैं जैसे दिवाली की सफाई आज ही करनी है ताकि उस कबाड़ को बेच कल घी के दिए जलाये जा सकें ! महीने -चार महीने की चांदनी अंधेरी रात में बदल जाती है | मुंगेरी के हसीन सपनों से सजीधजी रातें प्रेम में इंतज़ार को श्राप बताने लगती हैं !!

सब मोहमाया है प्यारे पर इधर ना माया  छूटती है ना शीला आती है !! जी करता है जोर से चिल्ला के कहूँ .........मोह छोड़ दो हवाबाजों , अज्ञात कुछ भी नहीं है और ज्ञात का अभिमान चूल्हे की राख है।

यहाँ  सिर पर नाच रही कवितायें रावण की जिद के आगे फेल हो जाती हैं। वैसे तो मोहल्ले के बड़े बुजुर्गों की सलाहियतों की दूकान का हिसाब ब्रह्मा के मुंशी भी नहीं रख सकते लेकिन यहाँ कुछ हैं जो खुद को ट्विटर का म्युन्सिपल इंस्पेक्टर समझ के जब तब चालान बनाने लगते हैं। ये कुटनियों के उस किरदार में हैं जो खाते खाते चक्कर लगा कर पान में कत्था -चूना मल देती हैं।

तो साहब, इश्क़ में ना तो कोई उम्र भर शमा के जला के बैठा है ना किसी की सलाइयों से स्वेटर के उतरने के इंतज़ार में दांत किटकिटा रहा है !  ये ट्विटर लोक है , यहाँ अतृप्त आत्माओं और शायर यारों का दबदबा है। इधर आना तो हथेली पर दिल लेकर आना और जाओ तो सारे दिलों को डिलीट करके जाना ताकि मैमोरी पर जोर ना पड़े और आप खुद को , हैंडल नहीं इंसान महसूस कर सको !! असली दिल इमोजी नहीं है , दिल इश्तिहार भी नहीं जो गली गली चिपकाया जा सके।

आईये इधर और गुजर जाईये...... रहने के लिए हैंडल नहीं घर चाहिए ,जीने के लिए इस खाते की नहीं उस खाते की जरूरत है ,जिसमें अपनों के सपने पलते हैं तो रुकने का नहीं इधर , ज्यादा सोचने का भी नहीं ! चलते रहिये !!

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